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नीतीश कुमार की छवि के आगे भाजपा बिहार में नतमस्तक बनी हुई है आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ

 

रिपोर्ट-इमरान मंसूरी

दिल्ली- बिहार का मुजफ्फरपुर जिला इन दिनों मासूम बच्चों की मौत की चितकार से गुंज रहा है। हर तरफ मातम छाया हुआ है, गम का माहौल बना हुआ है, लोगों का गुस्सा बेकाबु होता जा रहा है लेकिन राज्य सरकार को कब आएगा होश? खुदा जानें। 130 से अधिक बच्चों की चमकी बुखार के कारण हो चुकी है मौत। सरकार के मंत्रियों की जुबान भी बेलगाम हो चुकी है। बिहार की लग-भग सभी सियासी पार्टियाँ 2020 की तैयारी में जुटी हैं। यही कारण है कि भाजपा-जदयू0 की भेंट चढ़ गए 130 से अधिक मासूम बच्चे। नीतीश कुमार की जो छवि है बिहार में ‘‘सुशासन’’ की वह भाजपाईयों को हजम नहीं हो पा रहा है यही कारण है कि मासूम बच्चों की मौत का असल जिम्मेदार नीतीश कुमार को ही ठहराने में लगी हैं भाजपाई। भाजपा मासूमों की मौत के बहाने ही नीतीश कुमार की ‘‘सुशासन बाबु’’ वाली छवि को भी धुमिल करने का खेल खेल रही है। क्योंकि भाजपा बिहार में जदयू0 के साथ गठबंधन में जरूर है लेकिन बिहार में भाजपा जदयू0 के बैसाखी पर ही टिकी हुई है साथ ही नीतीश कुमार की छवि के आगे भाजपा बिहार में नतमस्तक भी बनी हुई है। उक्त बातें आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम ने मिडिया से बात करते हुए कही। श्री नजरे आलम ने आगे कहा कि राज्य एवं केंद्र की सरकार चमकी बुखार से मरने वाले मासूम बच्चों की जिम्मेदारी लेने की जगह मौत का जिम्मेदार लिची और 4जी नेटवर्क को ठहरा रही है। यह बेहद दुखःद मामला है। मुजफ्फरपुर में यह बिमारी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई सालों से इस बिमारी ने यहाँ के मासूमों की बड़ी संख्या में जानें ली है। सरकार इसपर कभी गंभीर नजर नहीं आई। अगर सरकार गंभीर होती तो इस बिमारी पर पहले ही काबु पाया जा सकता था। लेकिन कहावत है कि सियासत में सबकुछ जायज है चाहे किसी की जान ही क्यों ना लेनी पड़े। इसी की सजा मिल रही है बिहार के मासूम बच्चों को जिसकी मौत की चितकार कोई सुनने वाला नही है। श्री आलम ने कहा कि बिहार में बच्चे बड़ी संख्या में मर रहे हैं सरकार और विपक्ष की पार्टियाँ इसे सियासत समझ कर भुना रही है और खुब एक दूसरे को कोसती भी नजर आ रही है। हद तो यह है कि इस मामले में कुछ चैनल पर भी भले ही बच्चों की मौत का मातम दिखाया जा रहा हो लेकिन जिसे जायज तरीके से जिम्मेदार ठहराना चाहिए या दोषी बनाना चाहिए उसे कोई दिखाने वाला नहीं है। बिहार के मुखिया होने के नाते भले ही नीतीश कुमार सबसे अधिक जिम्मेदार हैं लेकिन जिस देश एवं राज्य का स्वास्थ्य मंत्री इस मामले को गंभीरता से नहीं लें समझा जा सकता है, स्वास्थ्य की जिम्मेदारी के लिए ही केंद्र और राज्य में स्वास्थ्य मंत्रालय बना हुआ है वहाँ पूरा सिस्टम काम करता है फिर स्वास्थ्य मंत्री इसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते? क्यों नहीं अपने पद से इस्तिफा दे रहे हैं? क्या जनता के सड़कों पर उतरने का इंतेजार कर रहे हैं? श्री आलम ने साफ शब्दों में कहा कि बिहार हो या देश किसी भी मासूम की मौत की चितकार बर्बाद नहीं जायगी, जनता सबकुछ देख और समझ रही है, बस इंतेजार करें मंत्री महोदय और सरकार, जनता जिस घड़ी सड़कों पर आ गई सारे मामले का जवाब तलाश लेगी।

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