रिपोर्ट/इमरान मंसूरी

लखनऊ। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष/रामवंशज राजा राजेंद्र सिंह अपने तीन दिवसीय (12 से 15 फरवरी 2021) दक्षिण भारत के दौरे के दौरान कर्नाटक आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में क्षत्रिय महासभा की ओर से सभाएं किया गई.

पहली सभा कर्नाटक के बंगलोर आंध्र प्रदेश कुप्पम चित्तूर जिला और तमिलनाडु के कोडलोर क्षत्रियों की सभा किया. जहां दक्षिण भारत के क्षत्रियों में भारी उत्साह दिखाई दिया. इस दौरान रामवंशज राजा राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सनातन क्षत्रिय धर्म मे गौ माता को सेवा करने के लिए एक जाति की जिम्मेदारी से सौंपी थी और उनको उनका जाति धर्म बता दिया था.

जिस प्रकार ब्राह्मण नाई धोबी कुम्हार लोहार कहार सोनार इत्यादि हैं सभी का अपनी जाति धर्म है उनका कर्म हैं क्षत्रिय धर्म का मूल कार्य देश भारत भूमि की और सामाजिक न्याय ब्यवस्था सुरक्षित रखना है साथ ही रामवंशज ने राजनैतिक पार्टियों व सरकारों को भी हिदायत देते हुए कहा कि क्षत्रियों के पूर्वजों को अन्य जाति का घोषित करने का दुस्साहस करने से बाज आएं वोटों की लालसा में नीचतापूर्ण कार्य नही करें और भगवान राजा रामचन्द्र जी, शाके शालिवाहन सम्राट हर्षवर्धन महाराजा त्रिलोकचन्द्र, महाराजा सुहेलदेव जी, राजा राव रामबख्श जी ये सूर्यवंश के प्रतापी कुलवंशज पूर्वज हैं.

इस अभियान में महासभा की महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन सिंह गहरवार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संगीता सिंह, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष बी के सिंह चौहान, सुशीला सिंह चौहान, सर्वेन्द्र सिंह राष्ट्रीय महामंत्री/आई टी प्रमुख, रूपेश सिंह गुजरात उपाध्यक्ष, दक्षिण भारत के राष्ट्रीय महामंत्री हरी सिंह, अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री सैंथिल जी पूरी निष्ठा से  क्षत्रियों को एकजुटता के आवाह्न किया है.